Myfayth

श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् (Vindhyeshwari Stotram)

निशुम्भ शुम्भ गर्जनी,

प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी ।

बनेरणे प्रकाशिनी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥
READ MOREPlayback speed1x Normal00:00/02:17Skip
त्रिशूल मुण्ड धारिणी,

धरा विघात हारिणी ।

गृहे-गृहे निवासिनी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

दरिद्र दुःख हारिणी,

सदा विभूति कारिणी ।

वियोग शोक हारिणी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

लसत्सुलोल लोचनं,

लतासनं वरप्रदं ।

कपाल-शूल धारिणी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

कराब्जदानदाधरां,

शिवाशिवां प्रदायिनी ।

वरा-वराननां शुभां,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

कपीन्द्न जामिनीप्रदां,

त्रिधा स्वरूप धारिणी ।

जले-थले निवासिनी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

विशिष्ट शिष्ट कारिणी,

विशाल रूप धारिणी ।

महोदरे विलासिनी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

पुंरदरादि सेवितां,

पुरादिवंशखण्डितम्‌ ।

विशुद्ध बुद्धिकारिणीं,

भजामि विन्ध्यवासिनीं ॥

दुर्गा चालीसा | आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | माता के भजन

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

"C_uayWxzLUUC4": { "on": "visible", "vars": { "event_name": "conversion", "transaction_id": "", "send_to": ["AW-11228319016/iWhqCKbb_a4YEKiaiuop"] } }
Scroll to Top