चेटी चंड जैसे त्यौहारों तथा सिंधी समाज के अन्य कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा गाई जाने वाली आरती। भगवान झूलेलाल के प्रत्येक मंदिर में यह आरती सुवह-शाम अवश्य गायी जाती है। भगवान झूलेलाल को लाल साई, उदेरो लाल, वरुण देव, दूलह लाल, दरिया लाल और जिंदा पीर भी कहा जाता है।

ॐ जय दूलह देवा,

साईं जय दूलह देवा ।

पूजा कनि था प्रेमी,

सिदुक रखी सेवा ॥

तुहिंजे दर दे केई,

सजण अचनि सवाली ।

दान वठन सभु दिलि,

सां कोन दिठुभ खाली ॥

॥ ॐ जय दूलह देवा…॥

अंधड़नि खे दिनव,

अखडियूँ – दुखियनि खे दारुं ।

पाए मन जूं मुरादूं,

सेवक कनि थारू ॥

॥ ॐ जय दूलह देवा…॥

फल फूलमेवा सब्जिऊ,

पोखनि मंझि पचिन ।

तुहिजे महिर मयासा अन्न,

बि आपर अपार थियनी ॥

॥ ॐ जय दूलह देवा…॥

ज्योति जगे थी जगु में,

लाल तुहिंजी लाली ।

अमरलाल अचु मूं वटी,

हे विश्व संदा वाली ॥

॥ ॐ जय दूलह देवा…॥

जगु जा जीव सभेई,

पाणिअ बिन प्यास ।

जेठानंद आनंद कर,

पूरन करियो आशा ॥

ॐ जय दूलह देवा,

साईं जय दूलह देवा ।

पूजा कनि था प्रेमी,

सिदुक रखी सेवा ॥

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